Saturday, 14 April 2018

Ashifa Rape Case - Full Story | Justice For Asifa | Fight For Rape Victim



नाम - Ashifa Banno, आयु - 8 साल, जम्मू के कठुआ जिले के रसना नामक गांव की रहने वाली।

यही वह मासूम सी लड़की है, जिसका अपहरण किया गया, कई दिनों तक रेप किया गया और बाद में बूरी तरह इसकी मृत्यु कर दी गई। इस मासूम सी लड़की के साथ इतनी दर्दनाक घटना घटी है, जिसे सुन किसी के भी रूह कांप जाए।


इस छोटी सी मासूम लड़की का जान तो नहीं बचाया जा सका, पर आज पूरा भारत इस घटने के उपर सवाल उठा रहा है। और अशिफा के साथ जो सर्मसार कर देने वाली घटना घटा, उसके खिलाफ इंसाफ मांग रहा है। चलिए अब हम आपको इस सर्मसार कर देने वाली घटना के बारे में पूरी बिस्तर से बताते हैं।


अशिफा बनो, जो जम्मू के कठुआ जिले के रसना नामक गांव की रहने वाली थी। ये मासूम सी लड़की अभी सिर्फ 8 साल की  थी और बकरवाल जाती से थी, यानी जो घोड़े और बकरी को पालते है।

एक दिन अशिफा बनो, अपने कुछ दोस्तो के साथ नदी के तरह घोड़े चराने गई। कुछ देर बाद उसने देखा कि उसकी एक घोड़ा दिखाई नही पर रहा है। उस घोड़े की खोज में अशिफा कुछ दूर निकल परी और लौट कर नहीं आयी।

उसके बाद अशिफा के परिवार वाले चिंतित होकर, पुलिस और CID ऑफिसर्स के साथ अशिफा के खोज में निकल परे, पर कोई फायदा नहीं हुआ। पुलिस वाले इस घटना को भूल गए, पर परिवार वाले ने छान बिन जारी रखा।


कुछ दिनों बाद जंगल में अशिफा का सव मिला। पुलिस वाले उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए। पोस्टमॉर्टम में जो रिपोर्ट मिला, उसे सुन आप हैरान हो जाएंगे की कैसे कोई इंसान एक मासूम सी लड़की के साथ इस तरह का दुष्कर्म कर सकता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अशिफा के साथ कई दिनों तक रेप किया गया, उसके बाद उसे छत से फेंक दिया गया। तभी उसकी सांस नहीं टूटी तो उसे बिजली का झटका दिया और रशी से गला दबा कर मार दिया गया। आप सोच सकते हैं, वह लड़की सिर्फ 8 साल की थी। कोई भी इंसान, इस मासूम सी लड़की के साथ इतनी बेरहमी से कैसे पेश आ सकता है।

अशिफा के माता-पिता पहले ही अपने 3 बच्चो को ऐक्सिडेंट में खो चुके हैं, और ये अशिफा उनकी इकलौती बेटी बची हुई थी, पर अब ये भी नहीं रही।


हमारी देश में आज कितनी इंसानियत बची हुई, आप इसी से समझ सकते हैं कि हमारी देश भारत में हर 22 मिनट्स में 1 लड़की का रेप होता है। खैर कानून क्या कर रही है, ये तो कानून ही जाने। पर हमारी ये फ़र्ज़ बनती है कि हम अपनी अंदर इंसानियत लाये, और ऐसे बुड़े कारनामों के खिलाफ आवाज उठाये।

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